Home एक साल में विद्युत क्षमता में होगी लगभग डेढ़ हजार मेगावाट की वृद्धि

एक साल में विद्युत क्षमता में होगी लगभग डेढ़ हजार मेगावाट की वृद्धि

प्रदेश में विद्युत क्षेत्र के विकास और विस्तार के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। प्रदेशवासियों को भरपूर और बिना बाधा के बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने जहाँ कोरोना काल में उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत दी है, वहीं उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान को भी प्राथमिकता दी है।

प्रदेश में उपलब्ध विद्युत क्षमता 30 नवम्बर 2020 की स्थिति में 21 हजार 220 मेगावाट है। पिछले 22 दिसम्बर को इतिहास में सर्वाधिक 15 हजार 21 मेगावाट मांग की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। अगले वित्त वर्ष में उपलब्ध विद्युत क्षमता में 1426 मेगावाट वृद्धि की योजना है।

अप्रैल 2020 से नवम्बर 2020 के बीच के उल्लेखनीय कार्य

विवरण

मात्रा

विद्युत उपलब्ध क्षमता में वृद्धि

356 मेगावाट

नये अति उच्च दाब उपकेन्द्र की स्थापना

12

अति उच्च दाब ट्रांसफार्मर की वृद्धि

30

अति उच्च दाब लाइनों का निर्माण

942 सर्किट कि.मी.

33/11 केव्ही उपकेन्द्र की स्थापना

8

पावर ट्रांसफार्मर

85

33 केव्ही लाइनों का निर्माण

260 कि.मी.

11 केव्ही लाइनों का निर्माण

670 कि.मी.

निम्न दाब लाइनों का निर्माण

231 कि.मी.

वितरण ट्रांसफार्मर की स्थापना

791 कि.मी.

उपभोक्ता संख्या में वृद्धि

1.90 लाख

प्रदेश में विद्युत पारेषण हानियाँ अब मात्र 2.59 प्रतिशत रह गई हैं। यह पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमेप के अंतर्गत भविष्य की विद्युत मांग की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये पारेषण प्रणाली के विस्तार कार्यक्रम मे ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, टैरिफ आधारित अति उच्च दाब उपकेन्द्रों और उनसे संबंधित लाइनों के निर्माण को शामिल किया गया है।

लॉकडाउन में उपभोक्ताओं को 1000 करोड़ की राहत

प्रदेश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता जो संबल योजना के हितग्राही है एवं माह अप्रैल 2020 में जिनके देयक की राशि 100 रूपये तक थी, उनके आगामी तीन माह में देयक राशि 100 रूपये तक आने पर इन माहों में 50 रूपये प्रतिमाह लिया गया। ऐसे घरेलू उपभोक्ता जिनके अप्रैल 2020 के देयक की राशि 100 रूपये तक थी उनके आगामी 3 माह के देयक राशि 100 से 400 तक आने पर उन तीन माहों में मात्र 100 रूपये प्रतिमाह की राशि का भुगतान लिया गया। ऐसे घरेलू उपभोक्ता जिनकी अप्रैल 2020 में देयक राशि 100 रूपये से अधिक परंतु 400 या उससे कम थी, उनके आगामी तीन माह के देयक राशि 400 से अधिक आने पर उन तीन माह में देयक की राशि का मात्र 50 प्रतिशत लिया गया है। प्रदेश के निम्न दाब, गैर घरेलू एवं निम्न दाब औद्योगिक, उच्च दाब टैरिफ एचव्ही 3 उपभोक्ताओं के अप्रैल, मई एवं जून 2020 के विद्युत देयकों में स्थायी प्रभार की वसूली को अस्थगित किया गया। उपभोक्ताओं द्वारा लॉकडाउन के चलते अप्रैल एवं मई माह के विद्युत बिलों का भुगतान नियत तिथि तक करने पर एक प्रतिशत की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि आगामी बिल में दी गई है। इन निर्णयों से उपभोक्ताओं को लगभग एक हजार करोड़ से अधिक की राहत प्रदान की गई।

उपभोक्ताओं के हित में लिये गये निर्णय

घरेलू उपभोक्ताओं से प्रथम 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर मात्र 100 रूपये लिये जाते हैं। अनुसूचित जाति-जनजाति के बीपीएल घरेलू उपभोक्ताओं से 30 यूनिट तक मासिक खपत पर मात्र 25 रूपये लिये जा रहे हैं। इन योजनाओं से प्रतिमाह लगभग एक करोड़ उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान रबी सीजन में कृषि उपभोक्ताओं को दिन के समय अधिक बिजली देने के लिये फ्लेक्सी प्लान लागू किया गया है। साथ ही खेती कार्य के लिये फ्लेट दरों पर बिजली दी जा रही है। इससे लगभग 22 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक हेक्टयर तक की भूमि वाले अनुसूचित जाति-जनजाति के लगभग 8 लाख बीपीएल धारक किसानों को नि:शुल्क बिजली दी जा रही है।

19 लाख से अधिक शिकायतें निराकृत

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिये केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों को सृदृढ़ किया गया है। अप्रैल से नवम्बर 2020 की अवधि में प्राप्त सभी करीब पौने 20 लाख शिकायतों का निराकरण किया गया। शिकायतों के निराकरण के बाद उपभोक्ता संतुष्टि के लिये फीडबैक व्यवस्था में इस दौरान 3 लाख 32 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं से सम्पर्क किया गया। औसत उपभोक्ता संतुष्टि प्रतिशत 98.4 प्रतिशत पाया गया। गलत बिजली बिल संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिये शिविर लगा कर 33 हजार से अधिक शिकायतों को मौके पर दूर किया गया। परिणामस्वरूप अब शिकायतों के निराकरण का औसत समय 71 से घटकर 35 मिनट रह गया है। इसे और कम करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।

बिजली सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा बिजली क्षेत्र में सुधारों के लिए बनाए गए मानदंडों को लागू करने में मध्यप्रदेश ने अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रदेश ने दिसंबर 2020 से विदिशा जिले में किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खाते  में देनी शुरू कर दी है। योजना में 60 हजार 81 लाभार्थियों के बैंक खातों में 32 करोड़ 7 लाख रुपये डीबीटी के जरिए भेजे गए। झाबुआ और सिवनी जिलों में भी योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन तीन जिलों के आधार पर इस योजना को अगले वित्त वर्ष में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस प्रकार प्रदेश ने बिजली क्षेत्र के लिए निर्धारित तीन सुधारों में से एक को सफलता से लागू कर दिया है।

आत्म-निर्भर म.प्र. रोड़मेप – 2023

आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश रोडमैप की प्राथमिकताओं में विद्युत अधोसंरचना कार्यों के लिए निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति, स्थानीय निर्मित सामग्री और उपकरणों की खरीदी में प्राथमिकता, वितरण अधोसंरचना के लगातार संधारण की व्यवस्था और गुणवत्ता पूर्ण सामग्री की खरीद के लिए इन हाउस परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना को शामिल किया गया है। साथ ही नियमित भुगतान वाले उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत प्रदाय में प्राथमिकता, मीटरिंग, बिलिंग और कनेक्शन पर ध्यान देते हुए उपभोक्ता सुविधा बढ़ाने और उपभोक्ता संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता, मीटर स्थापित कर उपभोक्ताओं को वास्तविक मीटर रीडिंग के देयक जारी करने को भी रोडमैप में रखा गया है। संधारण कार्य को प्राथमिकता, कृषि फीडर पर 10 घंटे विद्युत प्रदाय सुनिश्चित करना, जले/खराब ट्रांसफार्मर को निर्धारित समयावधि में बदलना, वितरण ट्रांसफार्मर के फेल होने की दर में कमी लाना, गुणवत्तापूर्ण सामग्री की खरीदी करना और विद्युत चोरी में कमी के लिए उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण में परिवर्तन के लिए जागरूकता अभियान को भी रोडमेप का हिस्सा बनाया गया है।