Home धर्म-एवं-ज्योतिष माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की बरसेगी कृपा, खुलेंगे मोक्ष प्राप्ति के...

माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की बरसेगी कृपा, खुलेंगे मोक्ष प्राप्ति के रास्तेमाघ पूर्णिमा के दिन होगी  सभी मनोकामनाएं पूरी,जरूर करें इस कथा का पाठ, 

26

माघ पूर्णिमा का व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा बहुत ही पुण्य फलदायी होती है। इस दिन पौराणिक कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

माघ पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। माघी पूरनमासी की तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन जप-तप और दान से विष्णु जी की कृपा मिलती है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा की पूजा के दौरान कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। ऐसा न करने से व्यक्ति शुभ फल की प्राप्ति से वंचित रहता है

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Date And Time)

माघ पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 की सुबह 05:52 से 2 फरवरी की सुबह 03:38 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा व्रत 1 फरवरी को रखा जाएगा। माघ पूर्णिमा पर पूरे दिन में कभी भी स्नान-दान कर सकते हैं। लेकिन सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

माघ पूर्णिमा व्रत की पौराणिक कथा

माघ पूर्णिमा को लेकर शास्त्रों में कुछ कथाएं वर्णित हैं। इनमें से एक हैं शुभव्रत ब्राह्मण की कथा। माघी पूर्णिमा की इस कथा के अनुसार, नर्मदा नदी के किनारे एक विद्वान ब्राह्मण निवास करता था, जिसका नाम शुभव्रत था। कथा में वर्णित है कि शुभव्रत इतना विद्वान होने के बावजूद बहुत ही लालची स्वभाव का व्यक्ति था। वह बस किसी न किसी तरह धन कमाने में यकीन रखता था, चाहे तरीका कोई भी हो। इसी कारण शुभव्रत समय से पूर्व ही वृद्ध दिखने लगा और कई तरह की बीमारियों ने भी उसे घेर लिया था। हालांकि, उसे समय रहते सद्बुद्धि आई और उसने सोचा कि पूरा जीवन तो धन कमाने में बीत गया, लेकिन अब जीवन का उद्धार कैसे हो सकेगा। 

यही सब विचार करते करते उसे माघ के महीने में पवित्र नदी के तट पर स्नान का महत्व बताने वाला एक श्लोक याद आया। इसके बाद स्नान का संकल्प लेकर ब्राह्मण शुभव्रत नर्मदा नदी में स्नान करने लगा। उसने करीब 9 दिनों तक नदी पर जाकर स्नान किया। इसके बाद शुभव्रत की तबियत और ज्यादा बिगड़ गई और उसकी मृत्यु का समय भी नजदीक आ गया। शुभव्रत सोच रहा था कि आज तक जीवन में उसने कोई अच्छी कार्य नहीं किया, तो अब मृत्यु के बाद नरक में ही जाना पड़ेगा, लेकिन इसके वितरित उसे मोक्ष मिला। क्योंकि शुभव्रत ने माघ मास में पवित्र नदी में जाकर स्नान किया, जिसके कारण अंत समय में लालची ब्राह्मण पर भगवान विष्णु ने कृपा बरसाई और ब्राह्मण के लिए मोक्ष प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त हुए।