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क्या होता है मां दुर्गा का खोइछा और कैसे भरा जाता है? जानें सही नियम

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शारदीय नवरात्रि की अष्टमी, नवमी और विजयादशमी पर मां दुर्गा का खोइछा भरने की परंपरा बहुत खास है. इस खबर में बताएंगे कि इसमें क्या सामग्री लगती है और इसे कैसे भरा जाता है.

नवरात्रि 

इस दौरान अलग-अलग जगह कई तरह से परंपराएं निभाई जाती है. इन्हीं परंपराओं में से एक परंपरा के बारे में हम इस खबर में बताएंगे. 

इस परंपरा को यूपी, बिहार में निभाया जाता है. इसे अष्टमी, नवमी और विजयदशमी के पावन दिन पर मनाया जाता है. 

इस परंपरा में मां दुर्गा का खोइछा भरने की रस्म होती है. खोइछा की पोटली होती है, जिसमें चावल, सुहाग का सामान और हल्दी जैसी शुभ रख दी जाती हैं. दरअसल इन चीजों को सुहाग का प्रतीक माना जाता है.

कुछ लोग जो खोइछा के बारे में ना जानते हों तो उन्हें बता दें कि इसको आप आचल भी कह सकते हैं. 

क्यों भरी जाती है मां दुर्गा की गोद?

आपने शादी में देखा होगा कि, जब लड़कियां ससुराल जाती है, तो उनके आचल में फल, चावल और सुहाग की चीजों को भरा जाता है. 

तो बिल्कुल वैसे ही नवरात्रि के आखिरी समय में जब माता जाने वाली रहती हैं, तो उसम में माता के गोद में ये सब डाला जाता है.

ये रस्म महिलाएं करती हैं. ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से माता उनके पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद देती हैं.

खोइछा की पोटली में क्या-क्या चीजें की जाती हैं शामिल?

अगर आप भी खोइछा तैयार कर रहे हैं तो उसमें कुछ खास चीजों का रहना जरूरी होता है. इसमें चावल, हरी दूर्वा घास, हल्दी, 5 पान के पत्ते और 5 सुपारी रखी जाती है.

आप और भी चीजें डालना चाहते हैं तो नारियल, कुछ सिक्के, मनपसंद मिठाई, सुहाग का सारा सामान जैसे चूड़ियां और महावर भी रख सकते हैं.

बहुत सरल तरीके से ऐसे भरा जाता है माता का खोइछा

अष्टमी, नवमी या फिर विजयदशमी के दिन माता रानी का खोइछा भरना बहुत आसान होता है. 

सबसे पहले मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति के सामने एक साफ लाल रंग का कपड़ा बिछा दें. इसके बाद उस लाल कपड़े के ऊपर सुहाग की सभी सामग्री और श्रृंगार का सामान रख दें. 

अब उसी कपड़े पर चावल, दूर्वा, हल्दी, मिठाई, फल, पान के पत्ते और सुपारी को रख दें. 

इन सभी पवित्र चीजों को एक साथ रखकर लाल कपड़े की एक सुंदर सी पोटली बना लें. 

अब इस पोटली को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ माता रानी के चरणों में अर्पित कर दें.

पूजा के दौरान जलाएं दीपक और मांगें आशीर्वाद

पोटली अर्पित करने के बाद उसके पास में ही शुद्ध देसी घी का एक दीपक जला लें. इसके बाद मां दुर्गा के सामने सच्चे मन से हाथ जोड़कर बैठ जाएं. 

माता से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें और अपनी मनोकामना बोलें. 

पूजा-पाठ के दौरान अगर कोई भूलचूक या गलती हो गई हो, तो देवी से उसके लिए क्षमा जरूर मांगें. 

इस तरह विधि-विधान से खोइछा भरने की प्रक्रिया पूरी होती है और माता रानी अपने भक्तों को आशीर्वाद देकर विदा होती हैं.

महिलाओं के लिए क्यों खास है यह परंपरा?

ये महिलाओं के लिए खास होता है क्योंकि वो माता दुर्गा को अपनी बेटी मानकर उनका आदर-सत्कार करती हैं.