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डॉ. मोहन यादव का अभ्‍युदय मध्‍यप्रदेश

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मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव उच्‍च शिक्षित, जमीन से जुड़े संवेदनशील, ऊर्जावान, ओजस्‍वी और बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व वाले सहृदयी जननेता हैं। शिक्षाविद् और राजनीतिज्ञ होने के साथ साहित्‍य और इतिहास में उनकी गहन रूचि है। संघर्षशील और दृढ़निश्‍चयी होना उनका स्‍वाभाविक गुण है। उनके मुख्‍यमंत्रित्‍व कार्यकाल में अनेक क्रांतिकारी कदम उठाये गये है, जिनके कारण मध्‍यप्रदेश चहुँमुखी विकास के पथ पर तीव्रगति से अग्रसर होते हुए मुख्‍यमंत्री के अभ्‍युदय मध्‍यप्रदेश के सपने को साकार कर रहा है।

यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के 61वें जन्‍मदिन पर मेरी शुभच्‍छाएं है कि वे मध्‍यप्रदेश को विकसित और देश का अग्रणी राज्‍य बनाने में सफल हो। उनका कार्यकाल इतिहास के पन्‍नों में स्‍वर्ण अक्षरों में अंकित हो।

उज्‍जैन के साधारण परिवार में जन्‍मे डॉ. मोहन यादव अपने परिश्रम के बलबूते छात्र राजनीति से होते हुए प्रदेश की सत्‍ता के शीर्ष तक पहुँचे है। शीर्ष पर रहते हुए भी वैचारिक जड़ों से जुड़े रहकर वे तकनीकी और प्रगतिशील सुधारों के पैरोकार बने हुए हैं। जनहितैषी और विकासोन्‍मुखी कार्यों से जहां वे अपनी लकीर को लम्‍बी कर रहे हैं, वहीं भाजपा की प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारकर पार्टी लाइन को भी आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का फोकस प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के 2047 तक आत्‍मनिर्भर, समृद्ध और विकसित भारत बनाने के संकल्‍प को सिद्ध करने में मध्‍यप्रदेश का अधिकाधिक योगदान देने पर केन्द्रित है। इसके लिए उन्‍होंने विकसित मध्‍यप्रदेश का 2047 विजन डॉक्‍युमेंट तैयार किया है। इसमें कृषि, उद्योग, एमएसएमई, सिंचाई, ऊर्जा, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यटन को बढ़ावा देकर प्रदेश के बहुआयामी विकास को पंख देने पर जोर है। इन्‍हीं लक्ष्‍यों की प्राप्ति के लिए उन्‍होंने वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया है।

उद्योग वर्ष में भोपाल में ग्‍लोबल इनवेस्‍टर्स समिट (GIS) आयोजित कर 30.70 लाख करोड़ रूपयों से ज्‍यादा के निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त किए जिनमें से 8.57 लाख करोड़ रूपयों से ज्‍यादा के प्रस्‍ताव धरातल पर उतर चुके हैं। इसी समिट में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से 18 नई नीतियों का लोकार्पण कराया गया। इनमें एमएसएमई विकास नीति, स्‍टार्ट-अप नीति और औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन प्रबंधन नियम भी शामिल है। इन नीतियों के क्रियान्‍वयन से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं और बड़े निवेशक आकर्षित हो रहे हैं।

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम श्रेणी के उद्यमियों को प्रोत्‍साहित करने तथा उद्योगों को बड़े शहरों की अपेक्षा संभाग, जिला और तहसील स्तर पर ले जाने के उद्देश्‍य से मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में रीजनल इन्‍डस्‍ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन का नवाचार किया, जिसमें आशातीत सफलता प्राप्‍त हुई। इन कॉन्क्लेव की शुरूआत उज्‍जैन से हुई। जबलपुर, ग्‍वालियर, सागर, रीवा और नर्मदापुरम सहित कुल सात RIC हुईं। इनके अलावा रतलाम में रीजनल इन्‍डस्‍ट्री स्किल एण्‍ड एम्‍पलायमेंट कॉनक्‍लेव (RISE) का सफल आयोजन हुआ। मुख्‍यमंत्री जी ने देश-विदेश के अनेक प्रमुख शहरों में जाकर उद्योगपतियों और निवेशकों से सीधे संवाद किया। उन्‍होंने अनेक शहरों में ‘रोड-शो’ भी किए। मुख्‍यमंत्री का विजन है कि विकास केवल किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित न रहकर समपूर्ण प्रदेश का संतुलित और समग्र विकास होना चाहिए। मुख्‍यमंत्री के ये कार्य दर्शातें हैं कि वे स्‍वयं औद्योगिक विकास के लिए दिन-रात समर्पित है और प्राण-पण से जुटे हुए हैं।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव की मंशानुरूप एमएसएमई भू-आवंटन प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्‍यम से फेसलेस की गई है। साथ ही एमएसएमई को प्रोत्‍साहन राशि वितरण को भी ऑनलाइन किया गया है। विगत 2 वर्षों में 4065 इकाइयों को ऑनलाइन माध्‍यम से 2780.44 करोड़ की वित्‍तीय सहायता प्रदान की गई। वर्ष 2019 से लंबित देयताओं का संपूर्ण भुगतान कर दिया गया है। इससे उद्यमियों में उत्‍साह जनक वातावरण निर्मित हुआ है, जो छोटे उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिये प्रोत्‍साहित कर रहा है। मुख्‍यमंत्री के मार्गदर्शन में एमएसएमई विभाग नए-नए नवाचारों के साथ उन्‍नति के नए सोपान रच रहा है। प्रदेश में 120 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्‍य हैं। प्रदेश 81 विधानसभा क्षेत्रों में भी औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का काम किया जा रहा हैं। विभाग द्वारा प्रथम बार गोविंदपुरा भोपाल में फ्लेटेड इंडस्ट्रियल पार्क का विकास किया जा रहा है।

इसके साथ ही प्रदेश में 19300 एकड़ भूमि में 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे है। इनमें पीएम मित्र टेक्‍स्‍टाइल पार्क-धार, मेडिकल डिवाइस पार्क-उज्‍जैन, मेगा लेदर फुटवेयर क्‍लस्‍टर-मुरैना, नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र मोहासा बाबई-नर्मदापुरम और रतलाम का मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने जैसी राष्‍ट्रीय महत्‍व की परियोजनाएं शामिल है। ये परियोजनाएं प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

धार के पीएम मित्र टेक्‍स्‍टाइल पार्क, महेश्‍वर, चंदेरी और बुरहानपुर के वस्‍त्र उद्योगों से ‘म.प्र. को कॉटन केपिटल ऑफ इंडिया’ का दर्जा प्राप्‍त हुआ है। प्रधानमंत्री ने आशा व्‍यक्‍त की है कि मध्‍यप्रदेश भारत के औद्योगिक और आर्थिक भविष्‍य का आधार स्‍तंभ बनेगा।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि कृषि की उन्‍नति के बिना विकास का सपना अधूरा है। प्रदेश की आर्थिक समृद्धि में कृषि क्षेत्र का बड़ा योगदान है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। किसानों की आय दो गुनी करने के लक्ष्‍य की पूर्ति की दिशा में उन्‍हें समर्थन मूल्‍य पर बोनस दिया जा रहा है। भावान्‍तर योजना का नवाचार भी इसी दृष्टि से किया गया, जिसका अनुसरण अन्‍य राज्‍य भी कर रहे हैं।

प्राचीनकाल से ही भारत में यह किंवदंती प्रचलित थी कि पारस पत्‍थर के स्‍पर्श से लोहा सोना हो जाता था। मुख्‍यमंत्री का मानना है कि वर्तमान समय में पारस पत्‍थर का काम पानी करता है, जब वह सूखे खेतों पर पहुँचता है तो फसलें लहलहाने लगती है। मुख्‍यमंत्री ने हर खेत को पानी पहुँचाने का संकल्‍प लिया है। इस संकल्‍प की सिद्धि के लिए उन्‍होंने केन-बेतवा और पार्वती-काली सिंध-चबंल तथा ताप्‍ती बेसिन मेगा रीचार्ज जैसी महत्‍वाकांक्षी अंतर्राज्‍यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं को उत्‍तरप्रदेश, राजस्‍थान और महाराष्‍ट्र सरकारों के साथ मिलकर धरातल पर उतारने का काम शुरू किया है।

आकर्षक राहत प्रदान कर कृषि पर आधारित उद्योगों को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्‍य मिल सके और स्‍थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्‍त हो सके। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं के पूर्ण होने पर मध्‍यप्रदेश उन्‍नति के शिखर पर पहुँचकर आत्‍मनिर्भर, विकसित और समृद्धशाली भारत के निर्माण में अद्वितीय और अमूल्‍य योगदान देने में सफल होगा और प्रगति के पथ का आधार स्‍तंभ बनेगा।